vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत
»
श्लोक 22
श्लोक
5.176.22
तत: स राजर्षिरभूद् दु:खशोकसमन्वित:।
कार्यं च प्रतिपेदे तन्मनसा सुमहातपा:॥ २२॥
अनुवाद
तब उस महान तपस्वी राजा ने शोक और शोक से पीड़ित होकर मन में आवश्यक कर्तव्य का निश्चय किया ॥22॥
Then that great ascetic king, tormented by grief and sorrow, decided in his mind about the necessary duty. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×