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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत
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श्लोक 16
श्लोक
5.176.16
ततस्ते तापसा: सर्वे पूजयन्ति स्म तं नृपम्।
पूजाभि: स्वागताद्याभिरासनेनोदकेन च॥ १६॥
अनुवाद
तब सभी तपस्वियों ने राजा होत्रवाहन का स्वागत करके, उनका कुशलक्षेम पूछकर, उन्हें आसन देकर तथा जल आदि पिलाकर उनका आदर-सत्कार किया।
Then all the ascetics honoured King Hotravahana by welcoming him, inquiring about his well-being, offering him a seat and offering water, etc.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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