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mahabharat 5.176.15: भीष्म कहते हैं: जब ब्राह्मण इस प्रकार विचारमग्न थे, तभी तपस्वी राजा होत्रवाहन वन में आये।   |   mahabharat अध्याय 5.176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.176.15 
भीष्म उवाच
इत्येवं तेषु विप्रेषु चिन्तयत्सु यथातथम्।
राजर्षिस्तद् वनं प्राप्तस्तपस्वी होत्रवाहन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं: जब ब्राह्मण इस प्रकार विचारमग्न थे, तभी तपस्वी राजा होत्रवाहन वन में आये।
 
Bhishma says: While the Brahmins were thus lost in thought, the ascetic King Hotravahan arrived in the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)