श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.176.1 
भीष्म उवाच
ततस्ते तापसा: सर्वे कार्यवन्तोऽभवंस्तदा।
तां कन्यां चिन्तयन्तस्ते किं कार्यमिति धर्मिण:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् वे सभी पुण्यात्मा तपस्वी उस कन्या के विषय में चिन्तित होकर सोचने लगे कि अब क्या करना चाहिए। उस समय वे उसके लिए कुछ करने को तत्पर हो गए॥1॥
 
Bhishma says - O King! Thereafter all those virtuous ascetics started worrying about that girl and thinking what should be done now. At that time they were ready to do something for her.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)