Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.175.8-9: वरवर्णिनी! मेरी इच्छा नहीं है कि मैं किसी अन्य की पत्नी को अपनी पत्नी बनाऊँ। मेरे जैसा सर्वज्ञ और धर्म का उपदेश करने वाला राजा, किसी अन्य पुरुष की पत्नी को अपने घर में कैसे प्रवेश दे सकता है? हे प्रिये! जहाँ तुम्हारी इच्छा हो, वहाँ जाओ। यहाँ अपना समय नष्ट मत करो।॥8-9॥ | mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाहं त्वय्यन्यपूर्वायां भार्यार्थी वरवर्णिनि।
कथमस्मद्विधो राजा परपूर्वां प्रवेशयेत्॥ ८॥
नारीं विदितविज्ञान: परेषां धर्ममादिशन्।
यथेष्टं गम्यतां भद्रे मा त्वां कालोऽत्यगादयम्॥ ९॥
अनुवाद
वरवर्णिनी! मेरी इच्छा नहीं है कि मैं किसी अन्य की पत्नी को अपनी पत्नी बनाऊँ। मेरे जैसा सर्वज्ञ और धर्म का उपदेश करने वाला राजा, किसी अन्य पुरुष की पत्नी को अपने घर में कैसे प्रवेश दे सकता है? हे प्रिये! जहाँ तुम्हारी इच्छा हो, वहाँ जाओ। यहाँ अपना समय नष्ट मत करो।॥8-9॥
‘Varavarnini! It is not my wish to make my wife a woman who has previously belonged to someone else. How can a king like me, who knows everything and preaches Dharma to others, allow a woman who has previously belonged to another man, to enter his house? O dear one! Go wherever you wish. Do not waste your time here.’॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥