Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.175.43: हे तपस्वी मुनियों! अब मैं पुनः अपने स्वजनों के पास नहीं जा सकता; क्योंकि राजा शाल्व ने मुझे कोरा उत्तर देकर त्याग दिया है, जिससे मेरा सारा जीवन सुखहीन (दुःख से युक्त) हो गया है॥ 43॥ | mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नोत्सहे तु पुनर्गन्तुं स्वजनं प्रति तापसा:।
प्रत्याख्याता निरानन्दा शाल्वेन च निराकृता॥ ४३॥
अनुवाद
हे तपस्वी मुनियों! अब मैं पुनः अपने स्वजनों के पास नहीं जा सकता; क्योंकि राजा शाल्व ने मुझे कोरा उत्तर देकर त्याग दिया है, जिससे मेरा सारा जीवन सुखहीन (दुःख से युक्त) हो गया है॥ 43॥
O ascetic saints! Now I cannot return to my relatives again; because King Shalva has given me a blank reply and abandoned me, due to which my whole life has become joyless (filled with sorrow).॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥