श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.175.42 
मयैव यानि कर्माणि पूर्वदेहे तु मूढया।
कृतानि नूनं पापानि तेषामेतत् फलं ध्रुवम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
मुझ मूर्खा स्त्री ने पूर्वजन्म में अपने शरीर से जो पाप किए थे, उनका यह दुःखदायी फल अवश्य ही भोगा है॥ 42॥
 
I, a foolish woman, have surely received these painful consequences of the sins I committed with my body in my previous life.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)