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mahabharat 5.175.38: उस आश्रम में शैखवत्य नाम के एक प्रसिद्ध तपस्वी ब्राह्मण रहते थे जो कठोर व्रतों का पालन करते थे और अच्छे गुरु थे तथा आरण्यक आदि शास्त्रों की शिक्षा देते थे ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.175.38 
ततस्तत्र महानासीद् ब्राह्मण: संशितव्रत:।
शैखावत्यस्तपोवृद्ध: शास्त्रे चारण्यके गुरु:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उस आश्रम में शैखवत्य नाम के एक प्रसिद्ध तपस्वी ब्राह्मण रहते थे जो कठोर व्रतों का पालन करते थे और अच्छे गुरु थे तथा आरण्यक आदि शास्त्रों की शिक्षा देते थे ॥38॥
 
In that ashram, there lived a famous ascetic Brahmin named Shaikhavatya who observed strict fasts and was a good guru who taught the scriptures, Aranyaka etc. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)