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mahabharat 5.175.37: महाबाहु भरतपुत्र! अम्बना ने शुद्ध मुस्कान के साथ उन महात्माओं को अपने साथ घटी हुई सारी घटना विस्तारपूर्वक बताई। किस प्रकार उसका अपहरण हुआ? किस प्रकार वह भीष्म से मुक्त हुई? और फिर किस प्रकार शाल्व ने उसका परित्याग किया, ये सब बातें उसने बताईं।॥37॥   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.175.37 
आचख्यौ च यथावृत्तं सर्वमात्मनि भारत।
विस्तरेण महाबाहो निखिलेन शुचिस्मिता।
हरणं च विसर्गं च शाल्वेन च विसर्जनम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु भरतपुत्र! अम्बना ने शुद्ध मुस्कान के साथ उन महात्माओं को अपने साथ घटी हुई सारी घटना विस्तारपूर्वक बताई। किस प्रकार उसका अपहरण हुआ? किस प्रकार वह भीष्म से मुक्त हुई? और फिर किस प्रकार शाल्व ने उसका परित्याग किया, ये सब बातें उसने बताईं।॥37॥
 
Mahabahu Bharata's son! Ambana with a pure smile told the entire incident that happened to her in detail to those great souls. How she was kidnapped? How she was freed from Bhishma? And then how Shalva abandoned her, she told all these things. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)