Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.175.29-30h: या फिर मुझे अपने मूर्ख पिता को दोष देना चाहिए जिन्होंने मेरा स्वयंवर रचा। मुझसे सबसे बड़ा अपराध तो यही हुआ है कि जब पूर्वकाल में वह भयंकर युद्ध चल रहा था, तब मैं शाल्व के लिए भीष्म के रथ से नहीं कूदा। | mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा पितरं मूढं यो मेऽकार्षीत् स्वयंवरम्।
मयायं स्वकृतो दोषो याहं भीष्मरथात् तदा॥ २९॥
प्रवृत्ते दारुणे युद्धे शाल्वार्थं नापतं पुरा।
अनुवाद
या फिर मुझे अपने मूर्ख पिता को दोष देना चाहिए जिन्होंने मेरा स्वयंवर रचा। मुझसे सबसे बड़ा अपराध तो यही हुआ है कि जब पूर्वकाल में वह भयंकर युद्ध चल रहा था, तब मैं शाल्व के लिए भीष्म के रथ से नहीं कूदा।
‘Or should I blame my foolish father who arranged my swayamvara. The biggest fault I have committed is that when that terrible battle was going on in the past, I did not jump from Bhishma's chariot for Shalva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥