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mahabharat 5.175.28: क्योंकि मैंने शाल्व के प्रेम को कारण बताकर भीष्म से यहाँ आने की अनुमति ली थी। अब क्या मुझे अपनी निन्दा करनी चाहिए या उन अजेय योद्धा भीष्म को शाप देना चाहिए?॥28॥   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.175.28 
अनुज्ञाता तु भीष्मेण शाल्वमुद्दिश्य कारणम्।
किं नु गर्हाम्यथात्मानमथ भीष्मं दुरासदम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि मैंने शाल्व के प्रेम को कारण बताकर भीष्म से यहाँ आने की अनुमति ली थी। अब क्या मुझे अपनी निन्दा करनी चाहिए या उन अजेय योद्धा भीष्म को शाप देना चाहिए?॥28॥
 
Because I had taken permission from Bhishma to come here citing the love of Shalva as the reason. Should I now criticise myself or curse that invincible warrior Bhishma?॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)