Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.175.27: मैं अपने भाई-बंधुओं से विमुख हो गया हूँ। राजा शाल्व ने भी मुझे त्याग दिया है। अब मैं हस्तिनापुर भी नहीं जा सकता॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.175.27 
बन्धुभिर्विप्रहीणास्मि शाल्वेन च निराकृता।
न च शक्यं पुनर्गन्तुं मया वारणसाह्वयम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने भाई-बंधुओं से विमुख हो गया हूँ। राजा शाल्व ने भी मुझे त्याग दिया है। अब मैं हस्तिनापुर भी नहीं जा सकता॥ 27॥
 
‘I have become distant from my brothers and relatives. King Shalva has also abandoned me. Now I cannot even go to Hastinapur.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)