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mahabharat 5.175.25: अदूरदर्शी शाल्व की यह बात सुनकर अम्बा दयनीय भाव से कुररी की भाँति रोती हुई नगर से बाहर चली गई।   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.175.25 
एवमुक्ता तु सा तेन शाल्वेनादीर्घदर्शिना।
निश्चक्राम पुराद् दीना रुदती कुररी यथा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अदूरदर्शी शाल्व की यह बात सुनकर अम्बा दयनीय भाव से कुररी की भाँति रोती हुई नगर से बाहर चली गई।
 
Upon hearing the short-sighted Shalva say this, Amba left the city weeping like a Kurri in a pitiable mood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)