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mahabharat 5.175.24: शाल्व ने उससे बार-बार कहा- 'सुष्रोणि! तुम जाओ, चले जाओ, मैं भीष्म से डरता हूँ। तुम्हें भीष्म ने गोद ले लिया है।'॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.175.24 
गच्छ गच्छेति तां शाल्व: पुन: पुनरभाषत।
बिभेमि भीष्मात् सुश्रोणि त्वं च भीष्मपरिग्रह:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शाल्व ने उससे बार-बार कहा- 'सुष्रोणि! तुम जाओ, चले जाओ, मैं भीष्म से डरता हूँ। तुम्हें भीष्म ने गोद ले लिया है।'॥ 24॥
 
Shalva repeatedly told her- 'Sushroni! You go, go away, I am afraid of Bhishma. You have been adopted by Bhishma.'॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)