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mahabharat 5.175.23: हे कुरुपुत्र! राजकुमारी अम्बा करुण स्वर में विलाप करती हुई इस प्रकार बहुत सी बातें कहती रही; किन्तु शाल्वराज ने उसे सर्वथा त्याग दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.175.23 
एवं तां भाषमाणां तु कन्यां शाल्वपतिस्तदा।
परितत्याज कौरव्य करुणं परिदेवतीम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! राजकुमारी अम्बा करुण स्वर में विलाप करती हुई इस प्रकार बहुत सी बातें कहती रही; किन्तु शाल्वराज ने उसे सर्वथा त्याग दिया।
 
O son of Kuruṇā! Princess Amba kept saying many things in this manner while lamenting in a pitiful voice; but the King of Sālva abandoned her altogether.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)