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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.175.20 
एवं बहुविधैर्वाक्यैर्याच्यमानस्तया नृप:।
नाश्रद्दधच्छाल्वपति: कन्यायां भरतर्षभ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भारतभूषण! अनेक प्रकार से बार-बार अनुरोध करने पर भी राजा शाल्व को उस कन्या की बात पर विश्वास नहीं हुआ।
 
Bharatbhushan! Despite repeated requests in various ways, King Shalva did not believe the girl's words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)