श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 174: अम्बाका शाल्वराजके प्रति अपना अनुराग प्रकट करके उनके पास जानेके लिये भीष्मसे आज्ञा माँगना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.174.7 
कथं मामन्यकामां त्वं राजधर्ममतीत्य वै।
वासयेथा गृहे भीष्म कौरव: सन् विशेषत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! मैं तो पराई स्त्री की कामना करने वाली राजकुमारी हूँ। आप कुरुवंशी होकर भी राजधर्म का उल्लंघन करके मुझे अपने घर में कैसे रख सकते हैं?॥ 7॥
 
Bheeshma! I am a princess who desires someone else. How can you, especially being a descendant of Kuru dynasty, violate the royal duty and keep me in your house?॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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