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mahabharat 5.174.6: मैंने मन ही मन शाल्वराज को पति रूप में वरण किया है और उन्होंने भी एकांत में मुझे स्वीकार कर लिया है। यह तो अतीत की बात है, जिसे मेरे पिता भी नहीं जानते॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.174: अम्बाका शाल्वराजके प्रति अपना अनुराग प्रकट करके उनके पास जानेके लिये भीष्मसे आज्ञा माँगना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 174: अम्बाका शाल्वराजके प्रति अपना अनुराग प्रकट करके उनके पास जानेके लिये भीष्मसे आज्ञा माँगना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.174.6 
मया शाल्वपति: पूर्वं मनसाभिवृतो वर:।
तेन चास्मि वृता पूर्वं रहस्यविदिते पितु:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैंने मन ही मन शाल्वराज को पति रूप में वरण किया है और उन्होंने भी एकांत में मुझे स्वीकार कर लिया है। यह तो अतीत की बात है, जिसे मेरे पिता भी नहीं जानते॥6॥
 
I have chosen Shalvaraj as my husband in my heart and he too has accepted me in solitude. This is a thing of the past which even my father is not aware of.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)