श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 174: अम्बाका शाल्वराजके प्रति अपना अनुराग प्रकट करके उनके पास जानेके लिये भीष्मसे आज्ञा माँगना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.174.2 
इमा: काशिपते: कन्या मया निर्जित्य पार्थिवान्।
विचित्रवीर्यस्य कृते वीर्यशुल्का हृता इति॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘माता! ये काशीराज की पुत्रियाँ हैं। इनका मूल्य वीरता है। इसीलिए मैं सभी राजाओं को हराकर इन्हें अपने भाई विचित्रवीर्य के लिए लाया हूँ।’॥2॥
 
‘Mother! These are the daughters of the King of Kashi. Their price was valour. That is why I have defeated all the kings and brought them for my brother Vichitravirya.’॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd