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श्लोक 5.174.10  |
कृपां कुरु महाबाहो मयि धर्मभृतां वर।
त्वं हि सत्यव्रतो वीर पृथिव्यामिति न: श्रुतम्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ! हे महाबाहु! मुझ पर दया करो। मैंने सुना है कि इस पृथ्वी पर तुम सत्यनिष्ठ महात्मा हो।॥10॥ |
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| Best among the virtuous! O mighty-armed warrior! Have mercy on me. I have heard that you are a truthful Mahatma on this earth.'॥10॥ |
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इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि अम्बावाक्ये चतु:सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें अम्बावाक्यविषयक एक सौ चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७४॥
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