श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 174: अम्बाका शाल्वराजके प्रति अपना अनुराग प्रकट करके उनके पास जानेके लिये भीष्मसे आज्ञा माँगना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.174.1 
भीष्म उवाच
ततोऽहं भरतश्रेष्ठ मातरं वीरमातरम्।
अभिगम्योपसंगृह्य दाशेयीमिदमब्रुवम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात मैं वीर माता दाशराज की पुत्री माता सत्यवती के पास गया और उनके चरणों में प्रणाम करके इस प्रकार बोला - 1॥
 
Bhishmaji says – Bharatshreshtha! Thereafter, I went to Mata Satyavati, the daughter of the brave mother Dashraj, and paid obeisance at her feet and said thus - 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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