श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 173: अम्बोपाख्यानका आरम्भ—भीष्मजीके द्वारा काशिराजकी कन्याओंका अपहरण  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  5.173.4-5 
महाराजो मम पिता शान्तनुर्लोकविश्रुत:।
दिष्टान्तमाप धर्मात्मा समये भरतर्षभ॥ ४॥
ततोऽहं भरतश्रेष्ठ प्रतिज्ञां परिपालयन्।
चित्राङ्गदं भ्रातरं वै महाराज्येऽभ्यषेचयम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जब मेरे धर्मात्मा पिता यशस्वी महाराज शान्तनु का स्वर्गवास हो गया, तब मैंने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार अपने भाई चित्रांगद को इस महान राज्य पर अभिषिक्त किया था। ॥4-5॥
 
O best of the Bharatas! When my righteous father, the renowned Maharaja Shantanu, passed away, I anointed my brother Chitrangada to this great kingdom in keeping with my promise. ॥4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)