श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 173: अम्बोपाख्यानका आरम्भ—भीष्मजीके द्वारा काशिराजकी कन्याओंका अपहरण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.173.23 
ततोऽहं ताश्च कन्या वै भ्रातुरर्थाय भारत।
तच्च कर्म महाबाहो सत्यवत्यै न्यवेदयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु भरतपुत्र! फिर मैंने उन कन्याओं को माता सत्यवती को सौंप दिया कि वे मेरे भाई के साथ विवाह करें और उन्हें अपना पराक्रम भी बताया।
 
Mighty-armed Bharata's son! Then I handed over those girls to mother Satyavati to be married to my brother and also told her about my prowess. 23.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि कन्याहरणे त्रिसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें कन्याहरणविषयक एक सौ तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७३॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल २४ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)