हे महाबाहु भरतपुत्र! फिर मैंने उन कन्याओं को माता सत्यवती को सौंप दिया कि वे मेरे भाई के साथ विवाह करें और उन्हें अपना पराक्रम भी बताया।
Mighty-armed Bharata's son! Then I handed over those girls to mother Satyavati to be married to my brother and also told her about my prowess. 23.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि कन्याहरणे त्रिसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें कन्याहरणविषयक एक सौ तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७३॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल २४ श्लोक हैं।]
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥