श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 173: अम्बोपाख्यानका आरम्भ—भीष्मजीके द्वारा काशिराजकी कन्याओंका अपहरण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.173.1 
दुर्योधन उवाच
किमर्थं भरतश्रेष्ठ नैव हन्या: शिखण्डिनम्।
उद्यतेषुमथो दृष्ट्वा समरेष्वाततायिनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने पूछा, "भरतश्रेष्ठ! जब युद्ध में शिखण्डी धनुष-बाण लेकर अत्याचारी की भाँति आपको मारने आएगा, तब आप उसे इस रूप में देखकर भी क्यों नहीं मारेंगे?"
 
Duryodhana asked, "Best of the Bharatas! When Shikhandi, with his bow and arrow, will come to kill you like a tyrant in the war, why will you not kill him even after seeing him in this form?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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