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mahabharat 5.172.5: पाण्डवों का प्रिय और उनके हित में तत्पर रहने वाला वीर पुरुजित् युद्ध में अपने भतीजों के लिए महान् कार्य करेगा ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 5.172: भीष्मका पाण्डवपक्षके अतिरथी वीरोंका वर्णन करते हुए शिखण्डी और पाण्डवोंका वध न करनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.172.5 
भागिनेयकृते वीर: स करिष्यति संगरे।
सुमहत् कर्म पाण्डूनां स्थित: प्रियहिते रत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों का प्रिय और उनके हित में तत्पर रहने वाला वीर पुरुजित् युद्ध में अपने भतीजों के लिए महान् कार्य करेगा ॥5॥
 
The valiant Purujit, who is dear to the Pandavas and is ready to serve his welfare, will perform great deeds in the war for his nephews. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)