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mahabharat 5.172.21: हे भरतश्रेष्ठ! मैं युद्ध में जितने भी अन्य राजा पाऊँगा, उन सबका वध कर दूँगा; परन्तु कुन्तीपुत्रों का वध कदापि नहीं करूँगा॥21॥   |   mahabharat अध्याय 5.172: भीष्मका पाण्डवपक्षके अतिरथी वीरोंका वर्णन करते हुए शिखण्डी और पाण्डवोंका वध न करनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 172: भीष्मका पाण्डवपक्षके अतिरथी वीरोंका वर्णन करते हुए शिखण्डी और पाण्डवोंका वध न करनेका कथन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.172.21 
सर्वांस्त्वन्यान् हनिष्यामि पार्थिवान् भरतर्षभ।
यान् समेष्यामि समरे न तु कुन्तीसुतान् नृप॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! मैं युद्ध में जितने भी अन्य राजा पाऊँगा, उन सबका वध कर दूँगा; परन्तु कुन्तीपुत्रों का वध कदापि नहीं करूँगा॥21॥
 
Bharatshrestha! I will kill all the other kings whom I find in battle; But I will never kill Kunti's sons. 21॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि रथातिरथसंख्यानपर्वणि द्विसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत रथातिरथसंख्यानपर्वमें एक सौ बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)