Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.172.17: सम्पूर्ण जगत् जानता है कि मैंने अपने पिता को प्रसन्न करने के लिए प्राप्त राज्य का त्याग कर दिया और दृढ़तापूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन करने लगा।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.172: भीष्मका पाण्डवपक्षके अतिरथी वीरोंका वर्णन करते हुए शिखण्डी और पाण्डवोंका वध न करनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 172: भीष्मका पाण्डवपक्षके अतिरथी वीरोंका वर्णन करते हुए शिखण्डी और पाण्डवोंका वध न करनेका कथन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.172.17 
लोकस्तं वेद यदहं पितु: प्रियचिकीर्षया।
प्राप्तं राज्यं परित्यज्य ब्रह्मचर्यव्रते स्थित:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् जानता है कि मैंने अपने पिता को प्रसन्न करने के लिए प्राप्त राज्य का त्याग कर दिया और दृढ़तापूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन करने लगा।॥17॥
 
The entire world knows that, in order to please my father, I gave up the kingdom that I had received and firmly devoted myself to the practice of celibacy.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)