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mahabharat 5.172.16: परंतु हे महाबाहो! यदि मैं पांचाल राजकुमार शिखंडी को धनुष पर बाण चढ़ाए हुए युद्ध में अपने सामने आता हुआ देखूँ, तो भी मैं उसे नहीं मारूँगा। ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 5.172: भीष्मका पाण्डवपक्षके अतिरथी वीरोंका वर्णन करते हुए शिखण्डी और पाण्डवोंका वध न करनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 172: भीष्मका पाण्डवपक्षके अतिरथी वीरोंका वर्णन करते हुए शिखण्डी और पाण्डवोंका वध न करनेका कथन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.172.16 
पाञ्चाल्यं तु महाबाहो नाहं हन्यां शिखण्डिनम्।
उद्यतेषुमथो दृष्ट्वा प्रतियुध्यन्तमाहवे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
परंतु हे महाबाहो! यदि मैं पांचाल राजकुमार शिखंडी को धनुष पर बाण चढ़ाए हुए युद्ध में अपने सामने आता हुआ देखूँ, तो भी मैं उसे नहीं मारूँगा। ॥16॥
 
But, O mighty-armed one, even if I see the Panchala prince Shikhandi facing me in battle with an arrow drawn on his bow, I will not kill him. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)