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mahabharat 5.171.21-22: जैसे तुम मुझ पर, आचार्य द्रोण पर और कृपाचार्य पर विचार करते हो, वैसे ही तुम उस प्रशंसनीय और श्रेष्ठ सारथि काशीराज पर भी विचार करो, जो युद्ध में अन्य वीरों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है और बड़ी फुर्ती से अस्त्र-शस्त्र चलाता है ॥21-22॥   |   mahabharat अध्याय 5.171: पाण्डवपक्षके रथी, महारथी एवं अतिरथी आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 171: पाण्डवपक्षके रथी, महारथी एवं अतिरथी आदिका वर्णन  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  5.171.21-22 
मां च द्रोणं कृपं चैव यथा सम्मन्यते भवान्॥ २१॥
तथा स समरश्लाघी मन्तव्यो रथसत्तम:।
काश्य: परमशीघ्रास्त्र: श्लाघनीयो नरोत्तम:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जैसे तुम मुझ पर, आचार्य द्रोण पर और कृपाचार्य पर विचार करते हो, वैसे ही तुम उस प्रशंसनीय और श्रेष्ठ सारथि काशीराज पर भी विचार करो, जो युद्ध में अन्य वीरों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है और बड़ी फुर्ती से अस्त्र-शस्त्र चलाता है ॥21-22॥
 
As you consider me, Acharya Drona and Kripacharya, you should also consider Kashiraj, the admirable and best charioteer, who competes with other heroes in battle and who uses weapons with great agility. 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)