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mahabharat 5.171.19: भरतनन्दन! महाराज! व्याघ्रदत्त और चन्द्रसेन - ये दोनों राजा भी मेरे विचार से पाण्डव सेना के श्रेष्ठ सारथि हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 5.171: पाण्डवपक्षके रथी, महारथी एवं अतिरथी आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 171: पाण्डवपक्षके रथी, महारथी एवं अतिरथी आदिका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.171.19 
व्याघ्रदत्तश्च राजेन्द्र चन्द्रसेनश्च भारत।
मतौ मम रथोदारौ पाण्डवानां न संशय:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! महाराज! व्याघ्रदत्त और चन्द्रसेन - ये दोनों राजा भी मेरे विचार से पाण्डव सेना के श्रेष्ठ सारथि हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है ॥19॥
 
Bharatnandan! Maharaj! Vyaghradatta and Chandrasen - these two kings are also the best charioteers of Pandavas army in my opinion, there is no doubt about it. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)