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mahabharat 5.171.10: राजेन्द्र! मेरे विचार से शत्रु नगर को जीतने वाले क्षत्रिय धर्म के भक्त क्षत्रियदेव ही पाण्डव सेना के श्रेष्ठ सारथि हैं॥10॥   |   mahabharat अध्याय 5.171: पाण्डवपक्षके रथी, महारथी एवं अतिरथी आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 171: पाण्डवपक्षके रथी, महारथी एवं अतिरथी आदिका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.171.10 
क्षत्रधर्मरतो मह्यं मत: परपुरंजय:।
क्षत्रदेवस्तु राजेन्द्र पाण्डवेषु रथोत्तम:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! मेरे विचार से शत्रु नगर को जीतने वाले क्षत्रिय धर्म के भक्त क्षत्रियदेव ही पाण्डव सेना के श्रेष्ठ सारथि हैं॥10॥
 
Rajendra! In my opinion, Kshatriyadev, the devotee of Kshatriya religion, who conquered the enemy city, is the best charioteer of the Pandavas army. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)