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mahabharat 5.170.12: पार्थ! धनुष को दृढ़तापूर्वक धारण करने वाले राजा विराट और द्रुपद ने एकमात्र वीर मार्ग का आश्रय लिया है। वे प्राणों की आहुति देकर भी, अपनी पूरी शक्ति से आपकी सेना से युद्ध करेंगे॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.170: पाण्डवपक्षके रथियों और महारथियोंका वर्णन तथा विराट और द्रुपदकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.170.12 
एकायनगतावेतौ पार्थिवौ दृढधन्विनौ।
प्राणांस्त्यक्त्वा परं शक्त्या घट्टितारौ परंतप॥ १२॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! धनुष को दृढ़तापूर्वक धारण करने वाले राजा विराट और द्रुपद ने एकमात्र वीर मार्ग का आश्रय लिया है। वे प्राणों की आहुति देकर भी, अपनी पूरी शक्ति से आपकी सेना से युद्ध करेंगे॥12॥
 
Partha! King Virata and Drupada, who hold the bow firmly, have taken refuge in the only heroic path. They will fight your army with all their might, even at the cost of their lives.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)