श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 17: अगस्त्यजीका इन्द्रसे नहुषके पतनका वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.17.7 
अगस्त्य उवाच
शृणु शक्र प्रियं वाक्यं यथा राजा दुरात्मवान्।
स्वर्गाद् भ्रष्टो दुराचारो नहुषो बलदर्पित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्य बोले, 'इन्द्र! यह शुभ समाचार सुनो कि दुष्ट और बल के अभिमान से युक्त राजा नहुष किस प्रकार स्वर्ग से निकाल दिया गया है।
 
Agastya said, 'Indra! Listen to the good news of how King Nahush, who was wicked and full of pride in his power, has been expelled from heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)