Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.17.5-6: शल्य कहते हैं- युधिष्ठिर! जब अगस्त्य ऋषि ने पूजा स्वीकार की और सिंहासन पर बैठे, उस समय देवेश्वर इन्द्र ने अत्यन्त प्रसन्न होकर उन विप्रशिरोमणि से पूछा - 'भगवन्! द्विजश्रेष्ठ! मैं आपके वचनों में यह सुनना चाहता हूँ कि पापयुक्त विचार रखने वाला नहुष किस प्रकार स्वर्ग से भ्रष्ट हो गया है?' | mahabharat अध्याय 5.17: अगस्त्यजीका इन्द्रसे नहुषके पतनका वृत्तान्त बताना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शल्य कहते हैं- युधिष्ठिर! जब अगस्त्य ऋषि ने पूजा स्वीकार की और सिंहासन पर बैठे, उस समय देवेश्वर इन्द्र ने अत्यन्त प्रसन्न होकर उन विप्रशिरोमणि से पूछा - 'भगवन्! द्विजश्रेष्ठ! मैं आपके वचनों में यह सुनना चाहता हूँ कि पापयुक्त विचार रखने वाला नहुष किस प्रकार स्वर्ग से भ्रष्ट हो गया है?'
Shalya says- Yudhishthir! When the sage Agastya accepted the puja and sat on the throne, at that time Deveshwar Indra became very happy and asked that Viprashiromani - 'Lord! Dwijshreshtha! I want to hear in your words how Nahusha, having sinful thoughts, has been corrupted from heaven?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥