श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 17: अगस्त्यजीका इन्द्रसे नहुषके पतनका वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.17.22 
उपागम्याब्रुवन् सर्वे दिष्टॺा वर्धसि शत्रुहन्।
हतश्च नहुष: पापो दिष्टॺागस्त्येन धीमता।
दिष्टॺा पापसमाचार: कृत: सर्पो महीतले॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वे सभी इंद्र के पास आए और बोले, "शत्रुहन! यह सौभाग्य की बात है कि आप उठ रहे हैं। बुद्धिमान अगस्त्य ने पापी नहुष को मारकर उसे पृथ्वी पर सर्प बना दिया। यह भी हमारे लिए बड़े हर्ष और सौभाग्य की बात है।"
 
All of them came to Indra and said, 'Shatruhan! It is a matter of good fortune that you are rising. The wise Agastya killed the sinner Nahush and turned him into a serpent on earth. This is also a matter of great joy and good fortune for us.'
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि इन्द्रागस्त्यसंवादे नहुषभ्रंशे सप्तदशोऽध्याय:॥ १७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें इन्द्र और अगस्त्यके संवादके प्रसंगमें नहुषके पतनसे सम्बन्ध रखनेवाला सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)