श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 17: अगस्त्यजीका इन्द्रसे नहुषके पतनका वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.17.19 
त्रिविष्टपं प्रपद्यस्व पाहि लोकाञ्छचीपते।
जितेन्द्रियो जितामित्र: स्तूयमानो महर्षिभि:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
शचीपते! अब तुमने अपनी इन्द्रियों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ली है। महर्षि तुम्हारी स्तुति करते हैं, अतः तुम स्वर्ग में जाओ और तीनों लोकों की रक्षा करो॥19॥
 
Shachipate! Now you have conquered your senses and enemies. The great sages praise you, so you go to heaven and protect the three worlds.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)