स्वयं राजा रथोदार: पाण्डव: कुन्तिनन्दन:।
अग्निवत् समरे तात चरिष्यति न संशय:॥ ३॥
अनुवाद
तत्! कुन्तिका का सुख बढ़ाने वाले पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर महारथी हैं। इसमें संदेह नहीं कि वे युद्धभूमि में अग्नि की भाँति सर्वत्र फैल जायेंगे।
Tat! King Yudhishthir, the son of Pandu, who enhances Kuntika's happiness, is a great charioteer. There is no doubt that they will spread everywhere like fire in the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥