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mahabharat 5.169.17-18: सम्पूर्ण देवताओं, दैत्यों, नागों, दैत्यों और यक्षों में अर्जुन के समान कोई नहीं है; फिर मनुष्यों में भी कोई कैसे हो सकता है? मैंने न तो भूतकाल में और न भविष्यकाल में ऐसे किसी सारथि के विषय में सुना है ॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 5.169: पाण्डवपक्षके रथी आदिका एवं उनकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवपक्षके रथी आदिका एवं उनकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  5.169.17-18 
न हि देवेषु सर्वेषु नासुरेषूरगेषु च॥ १७॥
राक्षसेष्वथ यक्षेषु नरेषु कुत एव तु।
भूतोऽथवा भविष्यो वा रथ: कश्चिन्मया श्रुत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण देवताओं, दैत्यों, नागों, दैत्यों और यक्षों में अर्जुन के समान कोई नहीं है; फिर मनुष्यों में भी कोई कैसे हो सकता है? मैंने न तो भूतकाल में और न भविष्यकाल में ऐसे किसी सारथि के विषय में सुना है ॥17-18॥
 
There is no one like Arjuna among all the gods, demons, serpents, devils and Yakshas; then how can there be any among humans? I have not heard of any such charioteer in the past or the future. ॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)