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mahabharat 5.169.11-13h: कुरुपुत्र! उसके अस्त्र-शस्त्रों, गदाओं और बाणों का प्रहार कोई नहीं झेल सकता। उसके अतिरिक्त न तो कोई उसके धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा सकता है, न ही कोई युद्ध में उसकी भारी गदा उठा सकता है, न ही कोई उसके बाण चला सकता है। वे सभी तुम्हें बचपन में ही तेज़ चलने, लक्ष्य भेदने, खाने-पीने और धूल में खेलने में परास्त कर देते थे।   |   mahabharat अध्याय 5.169: पाण्डवपक्षके रथी आदिका एवं उनकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवपक्षके रथी आदिका एवं उनकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 11-13h
 
 
श्लोक  5.169.11-13h 
न चैषां पुरुषा: केचिदायुधानि गदा: शरान्।
विषहन्ति सदा कर्तुमधिज्यान्यपि कौरव॥ ११॥
उद्यन्तुं वा गदा गुर्वी: शरान् वा क्षेप्तुमाहवे।
जवे लक्ष्यस्य हरणे भोज्ये पांसुविकर्षणे॥ १२॥
बालैरपि भवन्तस्तै: सर्व एव विशेषिता:।
 
 
अनुवाद
कुरुपुत्र! उसके अस्त्र-शस्त्रों, गदाओं और बाणों का प्रहार कोई नहीं झेल सकता। उसके अतिरिक्त न तो कोई उसके धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा सकता है, न ही कोई युद्ध में उसकी भारी गदा उठा सकता है, न ही कोई उसके बाण चला सकता है। वे सभी तुम्हें बचपन में ही तेज़ चलने, लक्ष्य भेदने, खाने-पीने और धूल में खेलने में परास्त कर देते थे।
 
Son of Kuru! No one can withstand the blow of his weapons, maces and arrows. Apart from him, no one can even string his bow, nor can anyone lift his heavy mace in battle, nor can anyone use his arrows. They all defeated you even in childhood in moving fast, hitting the target, eating and drinking and playing in the dust.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)