Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.168.5-7: यह कर्ण न तो महारथी है और न ही युद्धभूमि में सारथी कहलाने योग्य है, क्योंकि इस मूर्ख ने अपने स्वाभाविक कवच और दिव्य कुण्डल खो दिए हैं। यह सदैव दूसरों के प्रति द्वेष की भावना रखता है। परशुरामजी के शाप, ब्राह्मण के शाप और विजय प्राप्ति के उपर्युक्त उपकरणों के नष्ट हो जाने के कारण, मेरी दृष्टि में यह कर्ण अर्ध सारथी है। अर्जुन के साथ युद्ध करते समय यह कभी जीवित नहीं रह सकता। 5-7। | mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह कर्ण न तो महारथी है और न ही युद्धभूमि में सारथी कहलाने योग्य है, क्योंकि इस मूर्ख ने अपने स्वाभाविक कवच और दिव्य कुण्डल खो दिए हैं। यह सदैव दूसरों के प्रति द्वेष की भावना रखता है। परशुरामजी के शाप, ब्राह्मण के शाप और विजय प्राप्ति के उपर्युक्त उपकरणों के नष्ट हो जाने के कारण, मेरी दृष्टि में यह कर्ण अर्ध सारथी है। अर्जुन के साथ युद्ध करते समय यह कभी जीवित नहीं रह सकता। 5-7।
This Karna is neither a great charioteer nor is he worthy of being called a charioteer in the battlefield, because this fool has lost his natural armour and divine earrings. He always has a feeling of hatred towards others. Due to the curse of Parshuramji, the curse of the Brahmin and the loss of the above mentioned equipments for achieving victory, in my view this Karna is a half charioteer. He can never survive when he fights with Arjun. 5-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥