श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.168.41 
भूयश्च श्रोतुमिच्छामि परेषां रथसत्तमान्।
ये चैवातिरथास्तत्र ये चैव रथयूथपा:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
अब मैं पुनः शत्रु पक्ष के श्रेष्ठ रथियों, अतिरथियों और महारथियों का परिचय सुनना चाहता हूँ॥ 41॥
 
‘Now I once again wish to hear the introduction of the best charioteers, atirathi (great charioteers) and charioteers of the enemy side.॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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