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mahabharat 5.168.40: मेरे परम कल्याण पर अपना मन एकाग्र करो। तुम और कर्ण दोनों ही मेरे महान कार्य को पूर्ण करोगे।' 40   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.168.40 
चिन्त्यतामिदमेकाग्रं मम नि:श्रेयसं परम्।
उभावपि भवन्तौ मे महत् कर्म करिष्यत:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
मेरे परम कल्याण पर अपना मन एकाग्र करो। तुम और कर्ण दोनों ही मेरे महान कार्य को पूर्ण करोगे।' 40
 
‘Concentrate your mind on my ultimate welfare. Both you and Karna will accomplish my great task.' 40
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)