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mahabharat 5.168.39: तत्पश्चात् पराक्रमी राजा दुर्योधन ने भीष्म से कहा - 'गंगापुत्र! कृपया मेरी ओर देखिए, क्योंकि इस समय एक महान कार्य उपस्थित है।   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.168.39 
तमुवाच ततो राजा धार्तराष्ट्र: प्रतापवान्।
मां समीक्षस्व गाङ्गेय कार्यं हि महदुद्यतम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी राजा दुर्योधन ने भीष्म से कहा - 'गंगापुत्र! कृपया मेरी ओर देखिए, क्योंकि इस समय एक महान कार्य उपस्थित है।
 
Thereafter the mighty King Duryodhana said to Bhishma - 'Son of Ganga! Please look at me, because a great task is at hand at this time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)