Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.168.3-4: राजन! आपका यह प्रिय मित्र कर्ण, जो आपको पाण्डवों से युद्ध करने के लिए सदैव प्रोत्साहित करता है और युद्धभूमि में सदैव अपनी क्रूरता प्रदर्शित करता है, अत्यन्त कटुभाषी, आत्मप्रशंसक और नीच है। यही कर्ण आपका मंत्री, सेनापति और मित्र बन गया है। यह अभिमानी है और आपका सहयोग पाकर ही महान् पद पर पहुँचा है।॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सखा ते दयितो नित्यं य एष रणकर्कश:।
उत्साहयति राजंस्त्वां विग्रहे पाण्डवै: सह॥ ३॥
परुष: कत्थनो नीच: कर्णो वैकर्तनस्तव।
मन्त्री नेता च बन्धुश्च मानी चात्यन्तमुच्छ्रित:॥ ४॥
अनुवाद
राजन! आपका यह प्रिय मित्र कर्ण, जो आपको पाण्डवों से युद्ध करने के लिए सदैव प्रोत्साहित करता है और युद्धभूमि में सदैव अपनी क्रूरता प्रदर्शित करता है, अत्यन्त कटुभाषी, आत्मप्रशंसक और नीच है। यही कर्ण आपका मंत्री, सेनापति और मित्र बन गया है। यह अभिमानी है और आपका सहयोग पाकर ही महान् पद पर पहुँचा है।॥3-4॥
King! This dear friend of yours, Karna, who always encourages you to fight with the Pandavas and always displays his cruelty in the battlefield, is very harsh-spoken, self-praising and mean. This Karna has become your minister, leader and friend. He is arrogant and has risen to great heights by getting your support. ॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥