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mahabharat 5.168.28: नरेश्वर! आपने इन भीष्म को सेनापति बनाया है। विजय का यश सेनापति को ही प्राप्त होता है, वह योद्धाओं को किसी भी प्रकार प्राप्त नहीं होता।॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.168.28 
कृत: सेनापतिस्त्वेष त्वया भीष्मो नराधिप।
सेनापतौ यशो गन्ता न तु योधान् कथंचन॥ २८॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! आपने इन भीष्म को सेनापति बनाया है। विजय का यश सेनापति को ही प्राप्त होता है, वह योद्धाओं को किसी भी प्रकार प्राप्त नहीं होता।॥ 28॥
 
‘Nareshwar! You have made this Bhishma the commander. The glory of victory is received only by the commander; it is not received by the warriors in any way.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)