Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.168.16: कौरवों! केवल वृद्ध हो जाने, केश बढ़ जाने, बहुत धन इकट्ठा कर लेने तथा बहुत से भाई-बन्धु हो जाने से ही क्षत्रिय महारथी नहीं माना जा सकता॥16॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.168.16 
न हायनैर्न पलितैर्न वित्तैर्न च बन्धुभि:।
महारथत्वं संख्यातुं शक्यं क्षत्रस्य कौरव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कौरवों! केवल वृद्ध हो जाने, केश बढ़ जाने, बहुत धन इकट्ठा कर लेने तथा बहुत से भाई-बन्धु हो जाने से ही क्षत्रिय महारथी नहीं माना जा सकता॥16॥
 
Kauravas! A Kshatriya cannot be considered a Maharathi merely by growing old, having matured hair, accumulating a lot of wealth and having many brothers and relatives.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)