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mahabharat 5.168.12: मैं दुर्योधन के लिए चुपचाप यह सब सह रहा हूँ, परन्तु तुम मेरे साथ मूर्ख और कायर जैसा व्यवहार कर रहे हो॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.168.12 
मर्षयामि च तत् सर्वं दुर्योधनकृतेन वै।
त्वं तु मां मन्यसे मन्दं यथा कापुरुषं तथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं दुर्योधन के लिए चुपचाप यह सब सह रहा हूँ, परन्तु तुम मेरे साथ मूर्ख और कायर जैसा व्यवहार कर रहे हो॥12॥
 
I endure all this silently for the sake of Duryodhana, but you treat me like a fool and a coward.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)