Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.167.8: इस ब्राह्मण को अपने प्राण बहुत प्रिय हैं, इसलिए यह सदैव दीर्घायु रहना चाहता है (यह इसका दोष है)। अन्यथा दोनों सेनाओं में इसके समान बलवान कोई नहीं है॥8॥ | mahabharat अध्याय 5.167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जीवितं प्रियमत्यर्थमायुष्काम: सदा द्विज:।
न ह्यस्य सदृश: कश्चिदुभयो: सेनयोरपि॥ ८॥
अनुवाद
इस ब्राह्मण को अपने प्राण बहुत प्रिय हैं, इसलिए यह सदैव दीर्घायु रहना चाहता है (यह इसका दोष है)। अन्यथा दोनों सेनाओं में इसके समान बलवान कोई नहीं है॥8॥
This Brahmin loves his life very much, so he always wants to remain long-lived (this is his fault). Otherwise, there is no one as powerful as him in both the armies. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥