Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.167.4: महाराज! गाण्डीवधारी अर्जुन के समान उनके धनुष से एक साथ छोड़े गए अनेक बाण भी एक-दूसरे को स्पर्श करते हुए अपने लक्ष्य पर पहुँच जाते हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 5.167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.167.4 
एतस्य हि महाराज यथा गाण्डीवधन्वन:।
शरासनविनिर्मुक्ता: संसक्ता यान्ति सायका:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! गाण्डीवधारी अर्जुन के समान उनके धनुष से एक साथ छोड़े गए अनेक बाण भी एक-दूसरे को स्पर्श करते हुए अपने लक्ष्य पर पहुँच जाते हैं॥4॥
 
Maharaj! Like Arjuna, the bearer of Gandiva, many arrows shot simultaneously from his bow also reach their target touching each other. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)