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mahabharat 5.167.35: प्राग्ज्योतिषपुर के राजा भगदत्त अत्यंत वीर और प्रतापी हैं। वे हाथ में अंकुश लेकर हाथियों को नियंत्रित करने वाले शूरवीरों में सर्वोच्च स्थान रखते हैं। वे रथ-युद्ध में भी कुशल हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.167.35 
प्राग्ज्योतिषाधिपो वीरो भगदत्त: प्रतापवान्।
गजाङ्कुशधरश्रेष्ठो रथे चैव विशारद:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
प्राग्ज्योतिषपुर के राजा भगदत्त अत्यंत वीर और प्रतापी हैं। वे हाथ में अंकुश लेकर हाथियों को नियंत्रित करने वाले शूरवीरों में सर्वोच्च स्थान रखते हैं। वे रथ-युद्ध में भी कुशल हैं।
 
King Bhagdatta of Pragjyotishpur is very brave and majestic. He holds the highest rank among the braves who control elephants with the goad in their hands. He is also skilled in chariot fighting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)